लेखपाल की संदिग्ध मौत ने खोली प्रशासन की पोल, परिजनों का फूटा गुस्सा

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बिन्दकी फतेहपुर संवाददाता।

बिन्दकी तहसील क्षेत्र में एक लेखपाल की संदिग्ध आत्महत्या ने पूरे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि एसआईआर फॉर्म के दबाव में एसडीएम और कानूनगो द्वारा की गई मानसिक प्रताड़ना ने लेखपाल को मौत के लिए मजबूर कर दिया। स्थानीय प्रशासन की लगातार कोशिशों के बावजूद गुस्साए ग्रामीणों ने लगभग 24 घंटे तक शव उठने नहीं दिया जिससे शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता और क्षमता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुबह 6:30 बजे मिला शव अगले दिन होनी थी शादी खजुहा कस्बे में मंगलवार सुबह परिजनों ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो लेखपाल सुधीर कुमार कोरी (28) फांसी के फंदे पर मृत लटके मिले।परिवार के अनुसार सुधीर की अगले ही दिन शादी थी। ऐसे में यह घटना प्रशासनिक दबाव की थ्योरी को और मजबूत करती है। अधिकारियों पर सीधे आरोप मनमानी दबाव प्रताड़ना परिजनों और लेखपाल संघ का आरोप है कि सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एसडीएम संजय कुमार सक्सेना और राजस्व निरीक्षक शिवराम ने एसआईआर से जुड़े कार्यों को लेकर अत्यधिक दबाव बनाया। मृतक की बहन अमृता सिंह ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। अफसरों की मौजूदगी में 24 घंटे की रस्साकशी घटना के बाद मौके पर एसडीएम प्रियंका अग्रवाल कोतवाली प्रभारी हेमंत मिश्रा फिर बाद में एडीएम अविनाश त्रिपाठी और एएसपी महेंद्र पाल सिंह पहुंचे।
लेकिन परिजनों की एक ही जिद पहले मुकदमा फिर पोस्टमार्टम कई थानों की पुलिस मौजूद रही, फिर भी कोई समाधान नहीं निकल सका। नेताओं का दखल विरोध और उग्र कुछ देर बाद सपा नेता नरेश कोरी गणेश वर्मा और कोरी समाज के सिद्धार्थ गौतम भी पहुंच गए। इन नेताओं ने साफ घोषणा की जब तक दोषी अधिकारियों पर FIR नहीं होगी शव नहीं उठेगा।लेखपाल संघ भी उतरा मैदान में धरना तेज उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के अध्यक्ष कुलदीप सिंह, महामंत्री दीपक तिवारी समेत बड़ी संख्या में लेखपाल धरने पर बैठ गए। लगातार वार्तासमझाइश और पुलिस फोर्स की तैनाती के बावजूद शाम 5:30 बजे तक, यानी करीब 24 घंटे बाद भी, शव घर से बाहर नहीं निकाला जा सका। प्रशासन की नाकामी उजागर पूरे दिन चले हंगामे ने दिखा दिया कि प्रशासन संवाद स्थापित करने में विफल रहा कार्रवाई का आश्वासन भी परिजनों का भरोसा नहीं जीत सका और एक सरकारी कर्मचारी की मौत की जांच से पहले ही पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या आरोपित अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होगा या यह मौत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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