नाबालिग को बंधक बनाने के दोषी चार अभियुक्तों को 10-10 साल की सजा, पीड़िता को मिलेगा मुआवजा

Spread the love

आपकी खबरें न्यूज,
वाराणसी संवाददाता।

नाबालिग लड़की के अपहरण और उसे बंधक बनाकर रखने के मामले में न्यायालय ने चार अभियुक्तों को कड़ी सजा सुनाई है। यह फैसला स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (यूपीएसईबी) वाराणसी के न्यायाधीश विनोद कुमार ने सुनाया। अभियुक्तों के नाम शाहनवाज, बाबू उर्फ फिरोज, मंजू उर्फ मन्नू व बेबी हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से रोहित मौर्य, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा गंगाशरण, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, सीआईडी ने मामले की पैरवी की। वादी की ओर से सुधांशु गुप्ता एडवोकेट ने प्रभावी बहस प्रस्तुत की।
मामला क्या था
वादी मोहम्मद इब्राहिम ने दिनांक 26 नवंबर 2005 को थाना आदमपुर में अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की तहरीर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि अभियुक्तों ने उसकी बेटी का अपहरण कर लिया। पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई न होने पर वादी ने 29 नवंबर 2005 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, वाराणसी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।
मामले की विवेचना बाद में सीबीसीआईडी वाराणसी को स्थानांतरित की गई। जांच के दौरान पीड़िता को अभियुक्ता बेबी के घर से बरामद किया गया। उसका मेडिकल परीक्षण तथा धारा 164 दंप्रसं (CrPC) के तहत बयान दर्ज कराया गया। विवेचना पूर्ण होने के बाद चारों अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 363, 366 व 368 आईपीसी में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
सजा का ऐलान
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने दिनांक 5 दिसंबर 2025 को अभियुक्तों को दोषी करार दिया, जबकि 9 दिसंबर 2025 को सजा सुनाई गई।
धारा 363 आईपीसी के तहत
शाहनवाज, बाबू उर्फ फिरोज और मंजू उर्फ मन्नू को 7-7 वर्ष का कठोर कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना।
धारा 366 व 368 आईपीसी के तहत
शाहनवाज, बाबू उर्फ फिरोज, मंजू उर्फ मन्नू व बेबी को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना। न्यायालय ने आदेश दिया कि कुल जमा राशि 1 लाख 10 हजार रुपये में से 80 प्रतिशत यानी 88 हजार रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।

error: Content is protected !!