कुम्हारों के चाक पर रौनक दिवाली के लिए दीये बना रहे

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दिवाली के लिए मिट्टी के दीपक तैयार करते कारीगर

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हुसैनगंज फतेहपुर (नि.सं.)।

फतेहपुर में दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। हुसैनगंज क्षेत्र के कुम्हार दिन-रात मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हैं। हालांकि, इस पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तिवारीपुर गाँव के अनुभवी कुम्हार गोवर्धन, देवनारायण, कल्लू, लक्ष्मी, सुरेन्द्र कुमार, रामकरन, रजोल, बुदुन सहित प्रजापति समाज के लोग बताते हैं कि दीपावली से पहले का समय उनके लिए साल का सबसे व्यस्त मौसम होता है। वे सुबह से देर रात तक चाक पर काम करते हैं। उनके परिवार के बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग सदस्य भी मिट्टी तैयार करने और दीयों को आकार देने में सहयोग करते हैं। प्रजापति समाज के सदस्यों का कहना है कि उनकी मेहनत अब पहले जितनी फलदायी नहीं रही है। पहले हर घर में मिट्टी के दीये जलाए जाते थे, लेकिन अब बाजार में इलेक्ट्रॉनिक दीये और प्लास्टिक के खिलौने सस्ते व आकर्षक विकल्प बन गए हैं। इससे मिट्टी के दीयों की माँग में कमी आई है। बढ़ती महँगाई और मिट्टी की उपलब्धता में कमी के कारण उनकी उत्पादन लागत बढ़ गई है, जबकि बिक्री उतनी नहीं हो पाती। उन्हें सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले मोटर चालित चाक का लाभ भी नहीं मिल पाया है। इसके अतिरिक्त, मौसम की मार भी उनके काम को प्रभावित करती है। यदि बारिश का मौसम लंबा खिंच जाए, तो मिट्टी सूख नहीं पाती और काम रुक जाता है। इन सब चुनौतियों के बावजूद, कुम्हारों का अपनी पारंपरिक कला के प्रति समर्पण अटूट है।
गोवर्धन प्रजापति जैसे कारीगरों का कहना है कि यह हुनर उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखा है और इसे छोड़ना अपनी पहचान खोने जैसा होगा।

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