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लखनऊ संवाददाता।
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में इस समय सूरज अपनी पूरी ताकत के साथ आग बरसा रहा है। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, और नौतपा की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने प्रचंड रूप ले लिया है। यह गर्मी न सिर्फ दिन में लोगों का जीना मुहाल कर रही है, बल्कि रातें भी अब चैन नहीं लेने दे रही हैं। रात का तापमान लगातार बढ़ते हुए 26 डिग्री के पार पहुंच गया है, और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
तपिश ऐसी कि रात में भी नहीं सूख रहा पसीना
गर्मी का कहर इस कदर बढ़ गया है कि अब सिर्फ दोपहर ही नहीं, बल्कि रातें भी बेचैन कर रही हैं। लखनऊ में बीते कुछ दिनों से रात का न्यूनतम तापमान भी 26 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में न सिर्फ पंखे और कूलर बेअसर हो रहे हैं, बल्कि लोगों की नींद भी उचट रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले 48 घंटे और भी ज्यादा गर्म साबित हो सकते हैं। इस दौरान लू के थपेड़े दिन में बेहाल करेंगे और रात का पारा 27 डिग्री तक पहुंच सकता है।
नौतपा की एंट्री के साथ ही आग उगलने लगा सूरज
भारतीय पंचांग के अनुसार नौतपा का आरंभ होते ही गर्मी सबसे भीषण हो जाती है। यह वही समय होता है जब सूर्य अधिकतम ऊर्जा देता है और धरती पर उसका असर सर्वाधिक होता है। गुरुवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि तापमान 42.4 था, लेकिन उमस और तपिश ने लोगों को 46 डिग्री का अनुभव कराया। लखनऊ की सड़कों पर दोपहर 1 बजे के बाद जैसे ही सूर्य अपने प्रचंड रूप में आया, लोगों ने खुद को घरों और ऑफिसों में समेट लिया। छांव ढूंढ़ना और शरीर को ढक कर निकलना आम बात हो गई है।
अस्पतालों में बढ़ रहे हैं सनबर्न और स्किन एलर्जी के मरीज
गर्मी का एक और गंभीर असर देखा जा रहा है त्वचा रोगियों की संख्या में भारी इजाफा। राजधानी के बलरामपुर, सिविल और अन्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की ओपीडी में बड़ी संख्या में सनबर्न, रैशेज़, एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन के मरीज आ रहे हैं।
मानसून की धीमी रफ्तार लखनऊ से झांसी तक तापमान में उबाल, लू का खतरा बढ़ा
त्वचा विशेषज्ञ डॉ. एम.एच. उस्मानी के अनुसार: “लोगों को शरीर ढककर बाहर निकलना चाहिए और धूप में काम से बचना चाहिए। अत्यधिक पसीने और गीले कपड़ों से स्किन इन्फेक्शन बढ़ता है। “सनस्क्रीन का गलत इस्तेमाल भी कई बार समस्या बढ़ा देता है। इसे सही तरीके और सही SPF के साथ उपयोग करना जरूरी है।”
गर्मी से इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी भी बेहाल
गर्मी का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। सड़कों और बाग-बगीचों में पक्षियों को पानी की तलाश करते हुए देखा जा सकता है। जानवर भी छांव की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। नगर निगम ने इस संबंध में पानी की टंकियां और पक्षियों के लिए परिंडे लगाने की सलाह दी है।

