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वाराणसी संवाददाता।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने 5.02 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में मिश्र पोखरा, लक्सा निवासी आरोपी सूर्य नारायण यादव की जमानत अर्जी मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के बाद खारिज कर दी। अदालत में जमानत अर्जी का विरोध वादी के अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव व मुकेश सिंह ने किया।अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी सत्येन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने चेतगंज एसीपी को लिखित तहरीर दी थी कि मेसर्स निलाम्बर ट्रैक्सिम एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड ऑफ कम्पनीज वेस्ट बंगाल द्वारा 9 जून 1992 को पंजीकृत कम्पनी है तथा उक्त कम्पनी का पंजीकृत कार्यालय 94 एन.एस. रोड बज बज 24 एस.पी.जी. (साउथ) एन.ए. वेस्ट बंगाल, जिसका हेड ऑफिस मकान नं०-के0 67/84 इश्वरगंगी नाटी इमली शहर में स्थित है। प्रार्थी उपरोक्त कम्पनी मेसर्स निलाम्बर ट्रैक्सिम एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड का मैनेजर है।

उपरोक्त कम्पनी मेसर्स निलाम्बर ट्रैक्सिम एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड मे दो निदेशक जिसके पास कम्पनी के कोई शेयर्स नहीं है, उसमें मिश्र पोखरा लक्सा निवासी कवलधारी यादव व ईश्वरगंगी, नाटीइमली, थाना जैतपुरा निवासी अनिल कुमार श्रीवास्तव है। प्रार्थी की उपरोक्त वर्णित कम्पनी का दो बैंक खाता यस बैंक शाखा रामकटोरा में मौजूद है। बैंक खाता वादी की उक्त कम्पनी के जनरल आपरेशन का खाता है तथा खाता प्रार्थी की कम्पनी द्वारा यस सिक्योरिटी लिमिटेड के साथ शेयर्स क्रय व विक्रय का खाता है। उपरोक्त कम्पनी के (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) निदेशक मण्डल द्वारा यस बैंक शाखा रामकटोरा में स्थित दोनो एकाउंट्स को कम्पनी के हित में संचालित करने के लिये कम्पनी के उपरोक्त वर्णित निदेशक कवलधारी यादव को प्राधिकृत किया गया था। इस दौरान कवलधारी यादव ने अपनी पत्नी विद्या देवी, पुत्रगण ब्रह्मदेव व सूर्य नारायण, आशीष तिवारी, मंदीप सिंह, हिमांशु शुक्ला, शादाब राजा के साथ ही यश बैंक के तत्कालीन प्रबंधक व अन्य कर्मचारियों, मेसर्स मैक्समोर पेमेंट डिजिटेक प्रा. लि., मेसर्स वैभव ट्रेडर्स, मेसर्स दिव्यांशी ब्यूटीपार्लर, नेहा बानो, मेसर्स दीप कलेक्शन, मो. आमिर, उमंग गौतम ने आपस में मिली भगत करके प्रार्थी की कम्पनी का 5.02 करोड़ रुपए धोखाधड़ी करते हुए खाते से निकाल लिया। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इस मामले में आरोपी सूर्य नारायण को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

