सुरों की मलिका आशा भोसले का निधन, 92 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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मुंबई/नई दिल्ली न्यूज एजेंसी।

भारतीय संगीत और सिनेमा जगत के लिए सोमवार का दिन बेहद दुखद रहा। अपनी मधुर और जादुई आवाज़ से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान पार्श्व गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।
बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल
आशा भोसले भारतीय संगीत की उन विरली कलाकारों में शामिल रहीं, जिन्होंने हर भाव और हर शैली को अपनी आवाज़ दी। शास्त्रीय संगीत, फिल्मी गीत, ग़ज़ल, पॉप और कैबरे शैली तक उनकी गायकी का विस्तार रहा। उन्होंने हिंदी सहित मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी समेत 20 से अधिक भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गीत गाकर विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
सदाबहार गीतों की अमिट विरासत
उनके गाए गीत “पिया तू अब तो आजा”, “चुरा लिया है तुमने जो दिल को”, “दम मारो दम” और “इन आंखों की मस्ती के” आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं। उन्होंने महान संगीतकारों ओ.पी. नैय्यर, आर.डी. बर्मन और खय्याम के साथ मिलकर हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
अपनी अलग पहचान बनाने वाली कलाकार
महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन होने के बावजूद आशा भोसले ने संघर्ष और मेहनत के बल पर अपनी अलग और विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी आवाज़ की ऊर्जा, नज़ाकत और अदाओं ने उन्हें विश्व संगीत जगत में अलग स्थान दिलाया।
सम्मान और उपलब्धियां
संगीत क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया। उनके नाम सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग्स का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
देशभर से श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री, फिल्म और खेल जगत की अनेक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संगीत प्रेमियों का कहना है कि भारतीय संगीत ने आज अपनी सबसे मधुर आवाज़ खो दी, लेकिन उनके गीत सदियों तक लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे।

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