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हुसैनगंज फतेहपुर संवाददाता।
-हुसैनगंज क्षेत्र में प्रशासन की निगरानी व्यवस्था फेल, खेतों में धुआँ ही धुआँ।
हुसैनगंज क्षेत्र में शासन की सैटेलाइट निगरानी व्यवस्था धरी रह गई है। खेतों में किसान बेखौफ होकर पराली जला रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर रोक के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। खेतों से उठता धुआँ पूरे क्षेत्र को ढकने लगा है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो गया है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
प्रशासन ने सैटेलाइट के ज़रिए पराली जलाने वालों की पहचान और कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा। हुसैनगंज क्षेत्र के कई गाँवों में किसानों ने खुलेआम पराली जलाई।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सुबह और शाम खेतों में धुआँ उठता दिखाई देता है, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुँचता है, न ही कोई कार्रवाई होती है।
कृषि विभाग के मुताबिक, पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान है।
दो एकड़ तक 5,000,
दो से पाँच एकड़ तक 10,000,
पाँच एकड़ से अधिक भूमि पर 30,000 तक का जुर्माना।
इसके बावजूद किसानों पर रोक नहीं लग पा रही है। ग्राम पंचायतों को किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, मगर अधिकांश जगहों पर यह अभियान केवल कागजों में सिमटा है।
प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे न केवल हवा बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

