
आपकी खबरें न्यूज (पंकज झा)
वाराणसी संवाददाता।
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन बच्चों में इसका अत्यधिक प्रयोग गंभीर समस्या का कारण बन रहा है। बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर इसके नकारात्मक प्रभाव तेजी से सामने आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका द्विवेदी ने बताया कि मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप का लंबे समय तक प्रयोग करने से बच्चों में नींद की समस्या, आंखों की रोशनी पर प्रतिकूल असर, शारीरिक गतिविधियों में कमी, मानसिक थकान, एकाग्रता व स्मृति में कमी जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं। लंबे समय तक स्क्रीन टाइम से ऑटिज्म और एडीएचडी जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल चलाने से बच्चों की सामाजिक सहभागिता कम हो जाती है और वे आई-कॉन्टेक्ट से बचने लगते हैं। इसका सबसे बड़ा असर उनकी शिक्षा पर पड़ता है। ध्यान अवधि और पढ़ाई की आदत कम हो जाती है, जिससे भविष्य प्रभावित होता है। वहीं शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापा, हृदय रोग, बीपी और मधुमेह जैसी बीमारियां भी पनपने लगती हैं।अभिभावकों के लिए सुझाव डॉ. द्विवेदी ने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम अधिकतम 40 मिनट तक ही सीमित करें। भोजन के समय बच्चों को मोबाइल न दें। सुबह-शाम पार्क में ले जाकर खेलों में शामिल करें। प्रोजेक्ट कार्य में जरूरत पड़ने पर मदद करें और उनकी गतिविधियों पर नजर रखें।
बच्चों की रुचि पहचानकर उन्हें संगीत, नृत्य, पेंटिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों में लगाएं। रोजाना कम से कम 20 मिनट योग, प्राणायाम व खेलकूद कराएं। छोटे बच्चों को भोजन कराने के लिए मोबाइल बिल्कुल न दिखाएं और सोते समय बिस्तर पर मोबाइल न रखें।
अंत में डॉ. अनामिका ने कहा कि अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को संतुलित ढंग से मोबाइल का प्रयोग करना सिखाएं। मोबाइल का उपयोग केवल शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य निर्माण के लिए हो, न कि बीमारियों को न्योता देने के लिए।