आध्यात्मिक विकास की आधारशिला सनातन मूल्य-अर्चना तिवारी

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वाराणसी संवाददाता।

वसंता कॉलेज फॉर वूमेन राजघाट के दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना तिवारी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में भारतीय संस्कृति के सनातन मानवीय मूल्य नहीं मनुष्य का व्यवहार बदल रहा है। नैतिकता पर आधारित मानवीय मूल्य ही भारतीय संस्कृति की विशेषता है जो उसे पाश्चात्य संस्कृति से अलग पहचान दिलाती है। यह बातें उन्होंने बुधवार को आर्य महिला पीजी कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा विश्व दर्शन दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कही। प्रोफेसर तिवारी ने आगे कहा कि आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में उपजा भारतीय तार्किक चिंतन मनुष्य को विश्व की एक इकाई मानकर परिवार समाज के संरक्षण में व्यक्तित्व के विकास की बात करता है जबकि पाश्चात्य संस्कृति ज्ञान के नाम पर एकाकी जीवन जीने को बाध्य कर देती है। सनातन मूल्य जैसे करुणा, मैत्री ,मुदिता ,विश्वास, सद्भावना, सौहार्द्र और भाईचारा जैसे आंतरिक मानवीय मूल्य ऐसे सद्गुण हैं जिनसे भौतिकतावाद और आधुनिकतावाद के नाम पर परोसी जाने वाली फूहड़ता से उपजी समस्याओं से न केवल निपटा जा सकता है बल्कि इन मानवीय मूल्यों पर आधारित सुनहरे कल की नींव भी रखी जा सकती है। इसके पूर्व इस एक दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के साथ आर्य महिला पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर रचना दुबे ने दीप प्रज्वलन से किया। तदोपरान्त मंगलाचरण और कुलगीत की प्रस्तुति की गई। मुख्य वक्ता का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रचना दुबे ने किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉक्टर ममता गुप्ता, विभागाध्यक्षा ,दर्शनशास्त्र विभाग आर्य महिला पीजी कॉलेज, धन्यवाद ज्ञापन डॉ अनामिका सिंह, कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर असंगपऊ ने किया। इस अवसर पर डॉ शारदा, डॉक्टर ममता यादव, डॉ जया राय, श्रीकांत सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं छात्राओं की उपस्थिति रही।

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