महंगाई और बचत की अपील का असर-असोथर में फिर सुलगने लगे लकड़ी के चूल्हे

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असोथर फतेहपुर संवाददाता।

देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के सीमित उपयोग की सलाह के बाद लोग वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।
असोथर नगर पंचायत क्षेत्र में इसका जीवंत दृश्य देखने को मिला, जहां किला वार्ड निवासी वरिष्ठ महिला कमला देवी पत्नी माताबदल ब्लॉक मुख्यालय परिसर में सूखी लकड़ियों का गट्ठर बांधकर घर ले जाने की तैयारी करती नजर आईं। वह अपने बेटों रामबहादुर और फतेहबहादुर का इंतजार कर रही थीं ताकि लकड़ी घर पहुंचाई जा सके।
कमला देवी ने बताया कि रसोई गैस के बढ़ते दाम और सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। ऐसे में मजबूरी में फिर से लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। उनका कहना है कि लकड़ी से खाना बनाने में मेहनत जरूर ज्यादा लगती है, लेकिन खर्च कम होने से कुछ राहत मिलती है।
असोथर, रामनगर कौहन और जरौली सहित आसपास के गांवों में भी महिलाएं सुबह-शाम लकड़ी और कंडे एकत्र करती दिखाई दे रही हैं। ग्रामीण बुजुर्गों का कहना है कि पहले गांवों में चूल्हे पर ही भोजन बनता था, लेकिन गैस सुविधा आने के बाद यह परंपरा खत्म हो गई थी। अब महंगाई और बचत की जरूरत ने लोगों को फिर पुराने तरीकों की ओर लौटा दिया है।
ग्रामीणों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और संसाधनों की बचत की आवश्यकता ने गांवों में जीवनशैली को बदलना शुरू कर दिया है, जहां आधुनिक सुविधा के साथ पारंपरिक व्यवस्था फिर से जीवित होती नजर आ रही है।

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