जाम के झाम से राहगीर परेशानशासन-प्रशासन बना मुकदर्शक

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सात मील- डलमऊ मार्ग में लगा भीषण जाम

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हुसैनगंज फतेहपुर संवाददाता।

फतेहपुर से लखनऊ(एन एच 323) मार्ग पर स्थित गेगासो गंगा पुल के खराब होने अथवा उस पर कार्य चलने के कारण यातायात को सातमील तिराहे से डलमऊ(एन एच 232ए) मार्ग पर डायवर्ट कर दिया गया है। यह मार्ग वर्तमान परिस्थितियों में मुख्य विकल्प बन गया है, लेकिन इसकी क्षमता और व्यवस्था रोजमर्रा तथा व्यावसायिक आवागमन को संभालने में असमर्थ साबित हो रही है।
प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं और नतीजा यह है कि घंटों लंबा जाम अब आम समस्या बन चुकी है। एम्बुलेंसों में फंसे मरीज हों या दफ्तर, स्कूल-कॉलेज, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जाने वाले लोग-सभी अपने-अपने कार्य समय पर पूरा नहीं कर पा रहे। यह स्थिति न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रही है बल्कि आपातकालीन सेवाओं की गंभीर चुनौती भी बन चुकी है।
जनता की गम्भीर समस्या
1-समय की बर्बादी-रोज़ाना घंटों का समय जाम में निकल जाता है।
2-आर्थिक नुकसानईंधन की खपत बढ़ती है और व्यापारी समय से माल नहीं पहुंचा पाते।
3-स्वास्थ्य पर असर-मरीज और वृद्धजनों के लिए यह स्थिति खतरनाक है।
4-मानसिक तनाव-रोजमर्रा की देरी और परेशानी से लोगों में तनाव और आक्रोश बढ़ रहा है।
शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी
यातायात व्यवस्था सुचारु रखना शासन व प्रशासन की प्रथम जिम्मेदारी है। जब पुल या किसी मार्ग पर कार्य चल रहा हो, तो वैकल्पिक मार्ग केवल चिन्हित कर देना ही पर्याप्त नहीं है।
उस मार्ग की मरम्मत, चौड़ीकरण और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। ट्रैफिक पुलिस की पर्याप्त तैनाती होनी चाहिए ताकि जाम की स्थिति से निपटा जा सके।
जनता करदाता है और उसकी सुविधा सुनिश्चित करना सरकार व प्रशासन का दायित्व है। पुल निर्माण अथवा मरम्मत का कार्य आवश्यक है, किंतु इसके साथ-साथ यातायात की सुगमता और जनता की सुरक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। जाम के झाम से आमजन को मुक्ति दिलाना केवल मांग नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।

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