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फतेहपुर संवाददाता।
दिसम्बर से जून तक मोरंग खनन चलता है, इस दौरान जिला प्रशासन को करोड़ों का राजस्व भी मिलता है, जनपद में एक दर्जन के लगभग मोरंग खदान संचालित होती है, लेकिन वर्तमान में खनिज अधिकारी सौरभ गुप्ता के मिसमैनेजमेंट के कारण मात्र पांच खदाने संचालित हो रही है, अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए खनिज अधिकारी ने इन में कोर्रा, अढावल और लीलारा को खुली छूट दे रखी है, इन खंडों में नियमों और मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, खनिज अधिकारी की सह के चलते खनन कारोबारी बेखौफ होकर काम कर रहे है, आए दिन इन खंडों में जलधारा में खनन, पट्टा क्षेत्र के बाहर खनन आदि मामले सार्वजनिक हो रहे है लेकिन लगातार मीडिया और सोशल मीडिया में मामले उठने के बाद भी विभागीय अधिकारी कार्रवाई की जहमत नहीं उठा पा रहे है। कोर्रा खंड में रिकॉर्ड अवैध खनन हो रहा है। प्रतिदिन वायरल होने वाले वीडियो विभागीय शिथिलता से लेकर जिम्मेदारों की मिली भगत की चीख चीख का गवाही दे रहे है लेकिन जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

एक विभागीय अधिकारी की लिस्ट बनी चर्चा का विषय
अवैध खनन एवं परिवहन रोकने के लिए वाकायदा तहसील स्तर कर टास्कफोर्स गठित है लेकिन यह सब केवल कागजों तक ही सीमित है, नियमित निरीक्षण के बजाय ऑफिस में बैठकर ही शासन को रिपोर्ट दी जा रही है। खनन कारोबारियों में चर्चा है कि ललौली क्षेत्र की दो मोरंग खंड संचालकों को एक डेढ़ दर्जन लोगों की लिस्ट दी गई है। जिनके पते पर एक जिम्मेदार अधिकारी के साथ जाकर कारोबारियों ने पीला और सफेद लिफाफा भेंट किया है। एक विभागीय अधिकारी ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए मैनेजमेंट करने का यह आसान तरीका ईजाद किया है। अब तक यह तरीका कारगार भी साबित हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया में जिस तरह इस गठजोड़ की धज्जियां उठाई जा रही है वह शासन के जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए धब्बा साबित हो रही है।

