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जोश सैंडीफोर्ड।
सात महीने तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 56 वर्षीय मंजीत संघा आखिरकार घर लौट आई हैं। 32 सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहीं मंजीत को कई बार कार्डियक अरेस्ट हुआ और संक्रमण फैलने के कारण उनके दोनों हाथ और दोनों पैर घुटने के नीचे से काटने पड़े। अब स्वस्थ होने की राह पर आगे बढ़ रहीं मंजीत ने सेप्सिस के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया है।
बुधवार को जब वह Moseley Hall Hospital के वार्ड 9 से बाहर निकलीं तो परिवार और शुभचिंतकों ने उनका ‘हीरो’ की तरह स्वागत किया। उनका घर वॉल्वरहैम्प्टन/स्टैफ़ोर्डशायर बॉर्डर स्थित पेन क्षेत्र में है।

मामूली कट से जानलेवा संक्रमण
डॉक्टरों का मानना है कि सेप्सिस की शुरुआत किसी छोटे से कट या खरोंच से हुई होगी, जिसे उनके पालतू कुत्ते ने चाट लिया था। सेप्सिस एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ते-लड़ते अपने ही अंगों पर हमला करने लगता है।
NHS के अनुसार यह जानलेवा हो सकता है और इसके लक्षणों को पहचानना मुश्किल होता है। वहीं UK Sepsis Trust का कहना है कि ब्रिटेन में हर साल करीब 50,000 मौतें सेप्सिस से जुड़ी होती हैं।
बड़ों में इसके लक्षणों में तेज कंपकंपी, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, त्वचा का धब्बेदार या फीका पड़ना और बोलने में लड़खड़ाहट शामिल हैं।
एक वीकेंड में बदली जिंदगी
मंजीत, जो पहले फार्मेसी में सातों दिन काम करती थीं, पिछले साल जुलाई में एक रविवार को अस्वस्थ महसूस करते हुए घर लौटीं। सोमवार तक उनकी हालत गंभीर हो गई और वे कोमा में चली गईं।
उनके पति काम संघा ने बताया, “शनिवार को वह कुत्ते के साथ खेल रही थीं, सोमवार रात कोमा में थीं। सब कुछ 24 घंटे में बदल गया।”
वॉल्वरहैम्प्टन के New Cross Hospital में इलाज के दौरान उनका दिल छह बार रुका। बाद में डडली स्थित Russells Hall Hospital में सर्जनों को संक्रमण फैलने के कारण उनके चारों अंग काटने पड़े।
इलाज के दौरान उनकी स्प्लीन भी हटानी पड़ी, निमोनिया से जूझना पड़ा और गॉलस्टोन की समस्या भी सामने आई। मंजीत को अस्पताल में बिताया पहला महीना याद भी नहीं है।

37वीं सालगिरह भी अस्पताल में इस दंपति ने अपनी शादी की 37वीं सालगिरह और मंजीत का जन्मदिन अस्पताल में ही मनाया। उनके पति काम संघा पिछले सात महीनों से नौकरी से दूर रहकर हर कदम पर उनका साथ दे रहे हैं।
काम संघा ने कहा, “हर दिन लगता था कि वह शायद आज चली जाएंगी, लेकिन उन्होंने हर बार हमें गलत साबित किया। वह बेहद मजबूत हैं।”
प्रोस्थेटिक्स के लिए जुटाए जा रहे फंड
शुभचिंतकों ने अब तक £22,000 से अधिक की राशि जुटाई है। यह रकम एडवांस्ड प्रोस्थेटिक्स, जिनमें रोबोटिक हाथ भी शामिल हैं, के लिए खर्च की जाएगी।
मंजीत का कहना है, “मैं चलना चाहती हूं। मैं अपने प्रोस्थेटिक्स लगवाकर काम पर वापस जाना चाहती हूं। मैं काफी समय से कुर्सी और बिस्तर पर बैठ चुकी हूं, अब चलने का समय है।”
अब मंजीत संघा सेप्सिस के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहती हैं। उनका संदेश साफ है “यह किसी को भी हो सकता है।”


